इस आँच की तबीयत बिगड़ने लगी है
इसकी ज़ुबान बहने लगी है
चाट रही है-पतीले को
और दाल जल रही है
इसकी नीयत में सुराग लगता है
उसके पैबंद-
बदल रहे हैं
झुलस गये हैं...तो अच्छा है (वरना वो आग है तो है)
रिश्ते पहचान गये तो क्या कर लोगे..
चलो हवा दो या हवा आने दो
बंद करो-इनसे हम झुलसते नहीं
वक़्त की छुट्टी है-उसे आने तो दो...